लखनऊ. लालू प्रसाद यादव और राजा भैया दोनों ही अपने अपने राज्य के दबंग और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं....भले ही लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हो लेकिन राजभैया की राजशाही और उनके रुतबे की कहानी उन्हें अलग बनाती है...ये कहानी आम है कि राजभैया के महल में एक तालाब था जिसमें मगरमच्छ थे.
राजाभैया अपने विरोधियों को इस तलाब में फेंक देते थे. आज हम राजाभैया और लालू प्रसाद यादव की वो कहानी बताने जा रहे हैं जब पहली ही मुलाकात में लालू यादव ने राजभैया से पूछा था उस खूनी तालाब के बारे में जहां मगरमच्छ इंसानों को खाते थे.
1993 में राजैभैया पहली बार विधायक बने थे...इसके बाद चुनाव लड़ते रहे और जीतते रहे..अब तक कई सरकारों में मंत्री रहे राजा भैया के नाम पर कई तरह के दावे किये जाते हैं...कहा जाता है कि अपने घर में बने तालाब में मगरमच्छ पाल रखे थे.
चुनाव के दौरान अगर कोई उनके खिलाफ खड़ा होता था..या फिर कोई उनके खिलाफ आवाज उठाता था तो उसे तलाब में पल रहे मगरमच्छों को निवाला बना दिया जाता था...डर के मारे लोग राजाभैया के खिलाफ चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे....
साल 2003 में मायावती सिर्फ 6 महीने के लिए मुख्यमंत्री बनी थी इसी दौरान मायावती ने राजाभैया के इस तालाब को अपने कब्जे ले किया था...बताया जाता है कि जब तालाब से पानी निकाला गया तो कई कई इंसानी कंकाल निकले थे...इन कंकालों में से एक की पहचान संतोष मिश्रा के रुप में हुई थी.
कहते है संतोष मिश्रा का स्कूटर राजा भैया की गाड़ी से टक्करा गया था..इसके बाद राजा भैया के लोगों ने संतोष के साथ मारपीट की तालाब में फेंक दिया गया था....इस तालाब को मायावती ने डॉ. भीमराव आंबेडकर पक्षी विहार घोषित कर दिया था...इतना ही नहीं तालाब की बाउंड्रीवाल के भीतर एक गेस्ट हाउस बनवा दिया था...लेकिन 6 महीने बाद ही मायावती मुख्यमंत्री पद से हटी और मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने...
भदरी रियासत के इस तालाब के सरकारी कब्जे को मुलायम सिंह यादव ने रद्द कर दिया..और राजभैया को फिर से तालाब दे दिया गया... इसके बाद फिर ऐसा कहा जाने लगा था कि राजाभैया ने तालाब में मगरमच्छ पाल लिए है....तालाब में मगरमच्छ की कहानी को राजाभैया हमेशा झूठा बताते रहे हैं.
एक इंटरव्यू में अपने ऊपर लगे इन आरोपों के लिए राजा भैया ने अपना और लालू यादव का किस्सा बताया है...राजाभैया ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू यादव से पहले उनकी मुलाकात नहीं हुई थी.
पहली बार जब लालू राजैभैया से मिले तो उन्होंने सीधा राजैभैया से पूछा लिया कि अपने घर में मगरमच्छ पाले हो क्या... राजा भैया ने सफाई देते हुए कहा था कि तालाब में हमने मछलिया पाल रखी है...अगर वहां मगरमच्छ होते तो हमारी मछलिओं को वो खा जाते और मछली पालन से हुई मेरी कमाई नहीं होती....ये सच है कि राजा भैया ने तालाब और मगरमच्छ की कहानी को भले ही ना स्वीकारा हो लेकिन...अभी भी ये खौफ लोगों के जहन में जिंदा है...
राजा भैया के मुताबिक ये पूरी कहानी उनके लिए शर्मिंदगी का विषय बन गई है। उनका मानना है कि ये सारा फितूर उन्हें किसी फिल्मी डॉन की तरह प्रोजेक्ट करने के लिए पैदा किया गया है। खुद से जुड़ी कई तरह की अफवाहों पर वह कहते हैं कि प्रतापगढ़ के आंवले के साथ ही यहां की अफवाहें भी बहुत फेमस हैं.
राजा भैया के खिलाफ हत्या अपहरण जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं...लेकिन मायावती के अलावा किसी भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं थी...तालाब में मगरच्च्छ पालने की सच्चाई अभी भी एक पहेली है...क्या आपको लगता है कि राजा भैया जो सफाई दे रहे है वो सच है...क्या पुलिस राजा भैया पर कार्रवाई करने से डरती है...इस कहानी को लेकर आपकी क्या राय है कामेंट बाक्स में जरुर दें.
